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  • Writer's pictureमनीष सिरमौरी

शामती में प्रभावितों को लगभग 20 लाख रुपए की राहत राशि प्रदान

जि़ला प्रशासन ने आज शहर के शामती क्षेत्र के आपदा प्रभावितों को लगभग 20 लाख रुपए की राहत राशि प्रदान की। अतिरिक्त उपायुक्त अजय यादव ने यह जानकारी दी।

अजय यादव ने कहा कि मुख्यमन्त्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने जि़ला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि भारी वर्षा से त्रस्त जन-जन को न केवल समयबद्ध राहत प्रदान की जाए अपितु आवश्यकतानुसार उनके भोजन एवं रहने की व्यवस्था भी सुनिश्चित बनाई जाए। उन्होंने कहा कि जि़ला प्रशासन मुख्यमन्त्री के निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित बना रहा है।

उन्होंने कहा कि जि़ला प्रशासन आपदा के कारण प्रभावितों को त्वरित सहायता प्रदान करने एवं उनकी सुरक्षा के लिए कृत संकल्प है। हाल ही में हुई भारी वर्षा के कारण जहां एक और क्षतिग्रस्त अधोसंरचना को युद्ध स्तर पर ठीक किया जा रहा है वहीं पीड़ित व्यक्तियों तक शीघ्र राहत भी पहुंचाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि 1-2 दिनों में सभी प्रभावितों को राहत राशि प्रदान कर दी जाएगी।

अजय यादव ने कहा कि शामती में खतरे का आभास मिलते ही जि़ला प्रशासन ने त्वरित कार्यवाही कर न केवल संकटग्रस्त आवासों को खाली करवाया अपितु प्रभावित परिवारों के रहने-खाने की व्यवस्था भी की। उन्होंने कहा कि शामती में अभी तक कुल 45 भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से 25 भवन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हैं जबकि 20 भवनों में दरारें आई हैं।

उन्होंने भू वैज्ञानिकों के साथ शामती क्षेत्र का दौरा कर एहतियाती उपाय सुनिश्चित किए।

उन्होंने कहा कि भू वैज्ञानिकों के परामर्श के अनुसार शामती क्षेत्र की पहाड़ी में में आई दरारांें को राख और चूने के मिश्रण के साथ भरा जा रहा है ताकि दरारों को ठीक किया जा सके और मिट्टी को स्थाई पकड़ मिले।


अजय यादव ने कहा कि शामती क्षेत्र में आम जन की सुरक्षा के लिए खतरा दर्शाने के लिए सूचना पट्ट स्थापित किए गए हैं। पूरे क्षेत्र में पुलिस द्वारा नियमित गश्त लगाई जा रही है। क्षेत्र में विभिन्न निर्माण कार्यों पर भी रोक लगाई है।

उन्होंने कहा कि शामती में जल शक्ति विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि अत्यधिक भू-जल को 2-3 बोरवेल के माध्यम से बाहर निकाला जाए। कृषि विभाग द्वारा खेतों से अतिरिक्त जल को निकाला जा रहा है।

अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जि़ला प्रशासन यह प्रयास कर रहा है कि आम जन की सुरक्षा सुनिश्चित हो और अधोसंरचना को हुई क्षति की शीघ्र मुरम्मत हो ताकि जन-जीवन सामान्य हो सके।


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